पीएमएस एसोसिएशन ने वार्ता के दौरान व्यक्त की प्रशासनिक असंवेदनशीलता

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कहा-24 सितम्बर को हर जिले में दिया जायेगा डीएम को ज्ञापन
बोले-एक अक्टूबर को को काला फीता बांध करेंगे कार्य


फिरोजाबाद। पीएमएस एसोसिएशन उत्तर प्रदेश शाखा फिरोजाबाद के अध्यक्ष डा. आरके पाण्डेय, सचिव डा. राहुल जैन, वरिष्ठ चिकित्सक डा. आलोक कुमार ने संयुक्त रूप से वार्ता के दौरान प्रशासनिक असंवेदनशीलता के चलते सरकारी चिकित्सक को वृहद आन्दोलन को बाध्य होने की बात वार्ता के दौरान काली पट्टी बांधकर बतायी।
इस दौरान अपनी मांगे जो रखी हैं उनसे भी अवगत कराया। बताया कि सातवें वेतन आयोग के क्रम में प्राप्त मूल वेतन का 35 प्रतिशत प्रैक्टिस बन्दी भत्ता एक जनवरी 2016 से तत्काल दिया जाये। वर्षो से विभागीय प्रोन्नतियां लम्बित हैं, जबकि विभिन्न स्तरों पर प्रोन्नति हेतु पात्र चिकित्सक भारी संख्या में मौजूद हैं। स्वास्थ्य सेवा संवर्ग तथा दंत संवर्ग के सभी स्तरों पर तत्काल प्रोन्नति की जाये। विशेषज्ञ चिकित्सकों को उनकी विशेषज्ञता के सापेक्ष वेतन एवं भत्ते तथा उनकी विशेषज्ञता के अनुरूप संसाधन एवं समुचित कार्य दर्शायें उपलब्ध कराये। ग्रामीण भत्ता मूल वेतन का 25 प्रतिशत किया जाये। पोस्टमार्टम भत्ता प्रति केस रूपये से सौ से बढ़ाकर दो सौ रूपये किया जाये। आगे बताया कि वाहन भत्ता अथवा 40 लीटर पेट्रोल-डीजल जैसा की नोएडा प्राधिकरण के सरकारी चिकित्सक को मिलता है, दंत संवर्ग के चिकित्सकों को भी विशिष्ट एसीपी का लाभ एक दिसम्बर 2008 से दिया जाये। कार्य के घंटे निर्धारित किये जायें तथा राजपत्रित अवकाश में केवल इमरजेंसी सेवायें ही चालू रखीं जायें। वर्ष 1990-92 में तदर्थ रूप से नियुक्त लगभग एक हजार चिकित्सकों की नियुक्ति की तिथि से ही समस्त परिणामी लाभ प्रदान किया जाये। सेवानिवृत्त की आयु 60 से बढ़ाकर 62 कर दिया गया है तो विकल्प चुनने का अधिकार सेवारत चिकित्सकों को दिया जाये। स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति के अधिकार को कायम रखते हुये समस्त लम्बित आवेदनों को तत्काल निस्तारित किया जाये। बिडिंग के माध्यम से 250000 रूपये प्रतिमाह पर चिकित्सक मात्र आठ घंटे कार्य करने के लिये रखे जा रहे हैं जबकि नियमित चिकित्सकों को सेवा में आने के समय 24 घंटे सातों दिन का कार्य करने के उपरान्त भी मात्र रूपये 60000 से 70000 दिये जा रहे हैं। मारपीट की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण हेतु आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था चिकित्सा इकाइयों में कायम की जायें तथा इनके साथ साथ सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों को हथियार सहित सुरक्षा की जिम्मेदारी दी जाये। चिकित्साधिकारी के विरूद्ध लंबित जांच छह माह में निस्तारित की जायें। छह माह से अधिक समय व्यतीत होने पर उन्हें निर्दोष समझा जाये। आगे बताया कि 24 सितम्बर 2018 को सभी जिलों में इसको लेकर डीएम को ज्ञापन दिये जायेंगे और फिर कोई सुनवाई न होने पर एक को काला फीता बांधकर करर्य करेंगे।

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